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गुरुवार, 21 नवंबर 2013

सरस्वती वंदना (गीतिका छंद)

 ज्ञान दात्री शारदे मां, अब शरण में लीजिये ।
हम अज्ञानों से भरे है, ज्ञान उर भर दीजिये ।।
सत्य पथ पर चल सके हम, शक्ति इतना मन भरें ।
धर्म मानवता धरे हम, नष्ट दोषो को करें ।।
..................‘‘रमेश‘‘............... 

3 टिप्‍पणियां:

  1. पोस्ट का शीर्षक तो डाल दिया करो मित्र।

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  2. आदरणीय शास्त्रीयजी सतर्क करने के लिये साधुवाद । यथ संशोधित आभार

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार को (22-11-2013) खंडित ईश्वर की साधना (चर्चा - 1437) में "मयंक का कोना" पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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