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रविवार, 26 जनवरी 2014

विचारें गणतंत्र –पारदर्शिता या पासदर्शिता ? –पथिकअनजाना-466 वी.पोस्ट




   विचारें गणतंत्र –पारदर्शिता या पासदर्शिता ? 
आज  हम आ खडे फिर इक चौराहे पर हैं
राह जिसमें मनाई हैं खट्टी मीठी बरसियाँ
दूजी पार के मुखौटे में छिपी पासदर्शिता
तीजी गणतंत्र में विशुद्ध पारदर्शिता की हैं
चौथी मुखौटा गणतंत्र मौजूद पासदर्शिता
गये गुजरे नही है इशारा न समझे आप
प्रतिनिधि वापिस बुलाने का हक भटका
मौजूदा सत्ता ने दिया गणतंत्र – झटका
संभलें  वर्ना कथा  भस्मासुर की न होवे
न भाटों को चाटो नही प्रलोभन तुम बाँटो
पुकारता गुलाम गणतंत्र, बेडियाँ तो काटो
जियो यार जिन्दगी हक गणतंत्र का बाँटो
पथिक अनजाना
http://pathic64.blogspot.com


1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (27-01-2014) को "गणतन्त्र दिवस विशेष" (चर्चा मंच-1504) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    ६५वें गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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