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सोमवार, 27 जनवरी 2014

पहेली का हल ---पथिकअनजाना ४६७ वीं पोस्ट




    किस अंदाज से हम किस पहेली के हल को साबित करते हैं
हम अपने विवेक ज्ञान से हल खोज किसी तरह निकालेंगें
परीक्षक ने हल तमाम पहेलियों का निकाल सुरक्षित रखा हैं
कही ऐसी हस्ती नही जहाँ उस परीक्षक को चुनौती दी जावे
फैसला उसका अंतिम चाहे साबित करने का प्रयास कुछ करें
इंसा बेचारा हालातों का मारा जूझता रहता जीवन संग्राम में
विवशता की सीमा चाह नही विरूद्ध खुदा के कोई राह नही
खुदा जैसी कसौटी की सोच नही उसके निर्णय पर रोष नही
पथिकअनजाना    

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (28-01-2014) को "मेरा हर लफ्ज़ मेरे नाम की तस्वीर हो जाए" (चर्चा मंच-1506) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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