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बुधवार, 1 जनवरी 2014

गाउट सिर्फ और सिर्फ गाउट है इसे गठिया (संधिवात ,जोड़ों का दर्द )समझ लिया जाता है। आर्थ्राइटिस ,ऑस्टियो -आर्थ्राइटिस,रह्युमेटिक -आर्थ्राइटिस से बिलकुल अलग है यह अमीरों का रोग।

गाउट सिर्फ और सिर्फ गाउट है इसे गठिया (संधिवात ,जोड़ों का दर्द 

)समझ लिया जाता है। 

आर्थ्राइटिस ,ऑस्टियो -आर्थ्राइटिस,रह्युमेटिक -आर्थ्राइटिस  से बिलकुल 

अलग है यह अमीरों का रोग। 

मनुष्येतर स्तनपाई जीवों में ये देखने में नहीं आता है। क्योंकि इनमें 

मौज़ूद रहता है एक एन्ज़ाइम यूरिकेज़ जो यूरिक एसिड को सरलतम रूपों 

में विच्छिन्न कर देता है। 

यूरिक एसिड अपचयन (metabolism )से ताल्लुक रखता है गाउट।

पश्चिमी  मुल्कों की एक से दो फीसद आबादी इसकी चपेट में रहती है। 

मोटापे के साथ बढ़ता इस रोग का जोखिम  अलावा इसके उच्च रक्तचाप 

तथा इन्सुलिन रेजिस्टेंस भी इसके खतरे को बढ़ाते हैं।  

मर्दों में इसकी चपेट में आने के मौके पचासे के पार तथा महिलाओं में 

रजोनिवृत्ति के बाद बढ़ जाते हैं।  

खून में यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर (७. ० मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर 

पुरुषों के लिए तथा ६.० मिलीग्राम /डेसीलीटर औरतों के लिए )इसकी 

वजह बनता है। 

१० -१२ फीसद मामलों में इसका सम्बन्ध खुराक से देखा गया है। शराब 

और गाउट के बीच भी रिश्ता देखा गया है। गोस्त (meet ),समुद्र से प्राप्त 

खादय (वाइट मीट )तथा कृत्रिम मिठास फ्रॅक्टोज से तैयार कार्बोनेटिड 

ड्रिंक्स इसके खतरे को बढ़ा सकते हैं। 

प्रोटीन बहुल पनीर ,दालें ,प्रोटीन बहुल फलियां ,पालक ,टमाटर  आदि से 

भी परहेज़ी अच्छी  है। बाकी हरी सब्ज़ियाँ खूब खाएं। बहुत किया तो हफ्ते 

में एक बार दाल खा लें। जहां जहां प्रोटीन है वहाँ वहाँ से बचें (मसलन ओट 

मील्स आदि  ). इन सब खाद्यों से purine बनते हैं। 

प्यूरीन अपचयन से बनता है यूरिक एसिड और खून में इसका बढ़ा हुआ 

स्तर बनता है गाउट की वजह। तमाम दुग्ध उत्पाद (छाछ ,दही ,खोया 

आदि ),विटामिन -C और कॉफी भी इसके जोखिम को बढ़ाने वाले समझे 

गए हैं। 

परहेज़ बेहतर है दवाओं से। आनुवंशिक आधार भी ज़बरजस्त है इस रोग 

का। तीन जीवन इकाइयों को रेखांकित किया गया है जो इस रोग की 

पूर्वापरता को बढ़ाते हैं। 

खून में ट्राईग्लिसराइड भी कम करें। जहां भी दो जोड़ों का संयोग है वहाँ 

यूरिक एसिड के क्रिस्टल्स जमा हो जाते हैं इस रोग में। अंगूठा पैर का शुरू 

में इसकी चपेट में आ सकता है। एक दम से सेंसिटिव हो जाता है बिगर 

टो.दर्द का आलम  रात को सताता है। जैसे तलवार से काट दिया हो  किसी 

ने अगूंठा।

करें वही जो आपका ऑर्थोपीडिशियन बतलाये।  


Gout: The rich man’s disease


Incidence of gout increases in those having obesity, hypertension and insulin resistance.

Gfor gonorrhea, goiter and gout - so went the rugby song that we sang in our youth. The first G, gonorrhea, has almost disappeared. Sadly goiter and gout still remain. Described as a rich man's disease, gout is derived from the Latin word Guttae meaning a drop of liquid. It was believed that drops of blood enter the joints and cause the disease. It has been known as far back as 2600 BC and was documented first in Ancient Egypt. It is almost unknown in other mammals since they have the enzyme uricase, which breaks down uric acid.

Gout, a disorder of uric acid metabolism, affects 1-2 per cent of western population.

Epidemiological studies suggest an 80 per cent increase in the last decade in New Zealand and England mainly because of an increase in obesity. Increased levels of uric acid are defined typical as 7.0 mg/dl in men and 6.0 mg/dl in women. It usually occurs in men after they turn 50 and in women after menopause.



Dietary causes account for 10 to 12 per cent of gout cases and there is a strong association of alcohol consumption with gout; meat, seafood and fructose-sweetened drinks and aerated drinks may also be responsible.

Since uric acid is a breakdown product of purine metabolism, purine-rich vegetables such as beans, peas, lentils and spinach can also act as a dietary trigger to gout. There is some literature to suggest that coffee, vitamin C and dairy products may decrease the risk of gout. Physical fitness greatly decreases the risk of gout because of its salutary effects on insulin resistance.

There is a strong genetic association with gout and three genes have been identified with gout. There are a few rare genetic disorders associated with gout.



The incidence of gout increases in people who suffer from obesity, hypertension, high blood triglycerides and insulin resistance. Food poisoning, increased red blood cells, and renal failure also increase the level of uric acid making patients gout prone. An acute attack of gout usually occurs at night. In my experience, there is usually a trivial injury which triggers the attack. When the patient relates this to his doctor, it is often mistaken as an injury - the most often one being a stubbed toe.

The pain is excruciating, often affecting the base of the big toe. It appears warm, reddened and inflamed and is also often mistaken as infectious inflammatory arthritis. Many of these symptoms may be because of deposition of uric acid crystals in the joints. More than one joint may be involved and very occasionally the tendons of the foot as well.


I have never believed that making the patient miserable by severe dietetic restriction, despite an armamentarium of effective pharmacotherapy is the right thing to do. Nevertheless some dietary discretion is in line here with effective pharmacotherapy as judged by the physician. It is also correct that acute attacks of gout will resolve spontaneously and this often makes the patient believe that nothing is wrong.

On the other hand the dangers of pain killers now defined in several articles suggest that one use
 the safest for the shortest possible time to be prudent. With reasonable dietetic restriction and prudent pharmacotherapy one can override the situation, and at the same time not keep the patient miserable.

Gout: The rich man’s disease
Sweetened and aerated drinks can cause gout

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 02-01-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    गये साल को है प्रणाम!
    है नये साल का अभिनन्दन।।
    लाया हूँ स्वागत करने को
    थाली में कुछ अक्षत-चन्दन।।
    है नये साल का अभिनन्दन।।...
    --
    नवल वर्ष 2014 की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    उत्तर देंहटाएं