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मंगलवार, 7 जनवरी 2014

सामने सिर झुकावेगा ------पथिक अनजाना --- ४४६ वीं पोस्ट



सामने सिर  झुकावेगा
जिन्हें खुद पर यकीन नही वह भयभीत करते हैं
न फंसों बातों में लोगों की खुदा कुछ नही करेगा
ध्यान रखो तुम अहित नही किसी का कर रहे हो
सही राह पर हो वो भी आ सामने सिर झुकावेगा
जरूरत आत्मविश्वास, जरूरत न डगमगाने की
मजबूती से थामे रहो  गर राह कैसे कोई डरावेगा
फिक्र न करो दुनियायी हश्र की राह खुदा बतावेगा

पथिक अनजाना
       

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (08-01-2014) को "दिल का पैगाम " (चर्चा मंच:अंक 1486) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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