मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

बुधवार, 29 जनवरी 2014

ले परीक्षा कही हरि तो कही हर इंसा –पथिकअनजाना -469 वीं पोस्ट



कोशिशें कितनी भी करो सबको सदा यहाँ खुश रख नही सकते
कोशिशें थोडी करो सुकर्म करने की खुश खुदा को होना पडेगा
कहते क्यों हर घडी मियाँ खुदा के पीछे धो हाथ पडे रहते हो
सदा रहता मौजूद सामने हर इंसा के प्रश्न दुनियायी का जहाँ
हर को हरपल रिश्ते नाते मित्रों की परीक्षा से गुजरना होता हैं
अजीब कहानी इंसा की कही ले परीक्षा हरि तो कही हर इंसा हैं
शांति न जन्मने से पहले न जीवन दौरान न बाद मरने लिखा
पगले क्यों रखते याद कि जीवन में समझौता करना होता है
फैसला तलवार की नोक पर जीवन काट, खुश तीनों को करना
इक खुदाई दूजी इंसानी जमात व तीसरी जगह तू खुद अडा हैं
पथिक  अनजाना
http://pathic64.blogspot.com



     

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें