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शुक्रवार, 17 जनवरी 2014

श्याम स्मृति......अकर्म --- डा श्याम गुप्त ..



अकर्म -   आजकल टीवी, रेडियो , मोबाइल आदि पर अत्यधिक मनोरंजन, रीयलिटी शो, कामेडी शो,लाफ्टर, डांस-डांस  आदि में बच्चों, युवकों, किशोर-किशोरियों को अपने मूल शिक्षा कर्म से भटकाना भावी पीढी पर एक अत्याचार है |   स्टंट आदि वाले शो में व्यर्थ के स्टंट जो कभी जीवन में काम नहीं आते,  गंदे, वीभत्स,  अभक्ष्य पदार्थों में,  सर्प-कीडों में मुहं  या मुंह में डालने वाले द्रश्य |  सीमित ज्ञान वाले लोगों द्वारा सामाजिक आदि विषयों तथ्यों पर आधे-अधूरे सत्य, अति-नाटकीयता प्रदर्शन आदि-आदि  सभी  कार्य ...अकर्म  हैं।
             
शासन, जन-सामान्य, विद्वतजन, संस्थायें , सामाजिक -संस्थायें , आप और हम सभी को इसके बारे में सोचना चाहिए एवं इनसे बचना चाहिए , विरोध करना चाहिए |

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (19-01-2014) को "सत्य कहना-सत्य मानना" (चर्चा मंच-1496) पर भी होगी!
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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