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सोमवार, 31 मार्च 2014

दरबार खुदा का निर्णायक पुजारी-पथिकअनजाना-531 वीं पोस्ट

दरबार खुदा का निर्णायक पुजारी-पथिकअनजाना-531 वीं पोस्ट
लोग कुछ यहाँ पर किस्मत की बाट जोहते हैं
लोग मेहनतकणों को स्वर्ण मुद्रा में खोजते हैं
कुछ कफन के इंतजार में जिन्दगी बिताते हैं
इंतजार सभी को  बिताते वक्त अपने ढंग से
हैरां मंजिल से वाकिफ हो गुमराह खो जाते हैं
अनचाहे रंगी बादलों पर सवार मस्त होते हैं
अनजाने खुदा को सेवार्थ मदद को बुलाते हैं
इंसा औकात की नही सपने रंगीन सजाते हैं
हास्यापद दरबार खुदा का निर्णायक पुजारी
हैरां पथिक देख दुनिया के अजब जमाने को
कोसें जिन्दगी को खोजते जीने के बहानों को
इंतजार जिसे भूलना चाहे व कफन खोजते हैं
पथिक अनजाना












1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (01-04-2014) को "स्वप्न का संसार बन कर क्या करूँ" (चर्चा मंच-1562)"बुरा लगता हो तो चर्चा मंच पर आपकी पोस्ट का लिंक नहीं देंगे" (चर्चा मंच-1569) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    नवसम्वत्सर और चैत्र नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    कामना करता हूँ कि हमेशा हमारे देश में
    परस्पर प्रेम और सौहार्द्र बना रहे।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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