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रविवार, 9 मार्च 2014

क्‍यों हिन्‍दी भाषा नहीं पनप पा रही है Internet पर?

1995 में Internet को आम लोगों के लिए Publicly Open किया गया और तब से लेकर आज तक लगभग 18 साल हो गए हैं इंटरनेट को विकास करते हुए। लेकिन Internet पर आज भी हिन्‍दी भाषा का अस्तित्‍व न के बराबर है।

अंग्रेजी व चीनी भाषा के बाद दुनियां कि तीसरी सबसे ज्‍यादा बोली, समझी व लिखी जाने वाली हमारी भाषा ‘हिन्‍दी’, फिर भी अपने अस्तित्‍व के लिए संघर्ष कर रही है।

सारी दुनियां में भारतीय मूल के लोग रहते हैं, लेकिन फिर भी Internet पर ‘हिन्‍दी’ अपने अस्तित्‍व के लिए संघर्ष कर रही है।

दुनियां का दूसरा सबसे ज्‍यादा आबादी वाला हमारा देश भारत, फिर भी Internet पर ‘हिन्‍दी’ अपने अस्तित्‍व के लिए संघर्ष कर रही है।

आखिर क्‍यों?


क्‍या भारतीय लोग भी हिन्‍दी भाषा पसन्‍द नहीं करते?
क्‍या भारत की राष्‍ट्रीय भाषा हिन्‍दी नहीं होनी चाहिए थी?
क्‍या हिन्‍दी किसी भी अन्‍य भाषा की तुलना में ज्‍यादा जटिल भाषा है?
क्‍या हिन्‍दी की तुलना में अंग्रेजी भाषा को लोग एक Status Symbol की तरह Use करते हैं?


सवाल कई हैं लेकिन जब तक हम इन सवालों का बेहतर तरीके से विश्‍लेषण नहीं करेंगे, तब तक हम हिन्‍दी भाषा के Internet अस्तित्‍व के बारे में उपयुक्‍त निर्णय नहीं ले सकते और इस बात को भी तय नहीं कर सकते कि क्‍या कभी हिन्‍दी भाषा Internet पर अपने अस्तित्‍व को बरकरार रख भी सकेगी या नहीं और कैसे हिन्‍दी को बढावा दिया जा सकता है ताकि ज्‍यादा से ज्‍यादा हिन्‍दी भाषी भारतीय लोग इस Internet जैसे दुनियां के सबसे बडे व उपयोगी सूचना तंत्र का उपयोग करते हुए अपनी जिन्‍दगी को ज्‍यादा बेहतर बना सकते हैं?

हिन्‍दी भाषा के Internet अस्तित्‍व को लेकर मेरे अपने कुछ विचार हैं, जिन्‍हें में एक Article के माध्‍यम से रख रहा हूं और निश्चित रूप से आपके भी इस विषय में कुछ विचार होंगे, जिन्‍हें आप Comment के रूप में Discuss करेंगे, तो विषय में गंभीरता आएगी जो कि Internet पर हिन्‍दी के अस्तिव का भविष्‍य तय करने में उपयोगी साबित होगी।

चूंकि, मैं Programming and Development Field से सम्‍बंधित व्‍यक्ति हूं, इसलिए इस Article में मेरे द्वारा Discuss किए जाने वाले कारण काफी हद तक तकनीकी होंगे। लेकिन कुछ और कारण जरूर होंगे, जिन्‍हें आप भी Share करेंगे, तो बेहतर होगा।


वास्‍तव में हिन्‍दी भाषा अब हिन्‍दी रह ही नहीं गई है बल्कि Hindi + English = Hinglish हो गई है। यानी हम भारतीयों द्वारा बोला, लिखा या पढा जाने वाला कोई भी वाक्‍य ऐसा नहीं होता, जिसमें अंग्रेजी का कोई भी शब्‍द न हो। वर्तमान समय में हम लोग शुद्ध हिन्‍दी बोलते ही नहीं हैं, क्‍योंकि शुद्ध हिन्‍दी बोलने व समझने से ज्‍यादा आसान होता है शुद्ध अंग्रेजी बोलना।


दूसरा कारण
Internet को पूरी तरह से English आधारित ही रखा गया है, क्‍योंकि अंग्रेजी एक ऐसी भाषा है, जो लगभग सभी देशों में समान रूप से बोली, लिखी व समझी जाती है, जबकि हिन्‍दी भाषा तो स्‍वयं हमारे देश में भी एक जैसी बोली, लिखी व समझी नहीं जाती।


कभी कहीं पढा था मैंने कि हमारे देश में भी हर 11 किलोमीटर पर बोली, लिखी व समझी जाने वाली Local भाषा बदल जाती है। ऐसे में किसी Standard की तरह Hindi Language को Internet पर अपना स्‍थान कैसे प्राप्‍त हो सकता है।

जबकि हम यदि Standard हिन्‍दी भाषा यानी हमारी राष्‍ट्रीय भाषा की बात करें, तो उसे भी पूरे भारत में समान रूप से उपयोग में नहीं लिया जाता। क्‍योंकि राष्‍ट्रीय भाषा की तुलना में स्‍थानीय भाषा को ज्‍यादा महत्‍व दिया जाता है और उससे भी ज्‍यादा महत्‍व दिया जाता है अंग्रेजी को क्‍योंकि अंग्रेज तो चले गए, लेकिन अंग्रेजी भाषा को भारतीय लोगों के खून में छोड गए हैं।

इसीलिए:

स्‍वयं भारतीय लोग भी हिन्‍दी भाषा को उतना पसन्‍द नहीं करते, जितना अंग्रेजी को पसन्‍द करते हैं। क्‍योंकि हिन्‍दी की तुलना में अंग्रेजी भाषा को लोग एक Status Symbol की तरह Use करते हैं। जो व्‍यक्ति अंग्रेजी बोलता, लिखता या पढता है, उसे हमारे देश के हिन्‍दी भाषी लोग ज्‍यादा समझदार व High Profile व्‍यक्ति समझते हैं।


हिन्‍दी भाषा सीखना अंग्रेजी भाषा सीखने की तुलना में ज्‍यादा आसान है क्‍योंकि हिन्‍दी भाषा का विकास एक पूर्ण व्‍याकरणयुक्‍त वैज्ञानिक भाषा के रूप में किया गया था, जबकि अंग्रेजी भाषा का विकास मूल रूप से भावनाओं व विचारों का आसानी से लेनदेन हो सके, इस बात को ध्‍यान में रखते हुए किया गया था।


इसलिए अंग्रेजी भाषा सीखना किसी भी व्‍यक्ति के लिए हिन्‍दी भाषा सीखने की तुलना में ज्‍यादा आसान होता है। यही कारण है कि स्‍वयं हमारे देश में भी आधी से ज्‍यादा जनसंख्‍या तब तक हिन्‍दी भाषा का प्रयोग करते हुए बातचीत नहीं करते, जब तक कि उनकी Local Language या English से काम चल सकता हो।

साथ ही अंग्रेजी भाषी देशों ने लगभग दुनियां के हर देश पर राज किया है और हर देश में एक Standard Language की तरह अंग्रेजी भाषा को सैकडों सालों तक Directly या Indirectly Promote किया है। इसलिए अंग्रेजी का अस्तित्‍व लगभग सारी दुनियां में है जबकि हिन्‍दी का अस्तित्‍व तो स्‍वयं भारत में भी 100 प्रतिशत नहीं है।


उपरोक्‍त तीनों कारण मूल रूप से वस्‍तु, स्थिति व स्‍थान पर निर्भर हैं, जबकि इंटरनेट पर हिन्‍दी का अस्तित्‍व इसलिए न के बराबर है क्‍योंकि Internet को पूरी तरह से अंग्रेजी भाषी देशों ने विकसित किया है और अंग्रेजी एक International Language है। हालांकि इसे Develop करने वाले ज्‍यादातर लोग भारतीय ही रहे हैं, लेकिन भारत में इन्‍हें महत्‍व न मिलने की वजह से ये अन्‍य देशों में चले गए और वहां उन चीजों को विकसित किया, जिन्‍हें सारी दुनियां Use करती है और हम भारतीय लोग उन्‍हीं चीजों को Use करने के लिए पैसा खर्च करते हैं, जिन्‍हें हमारे ही देश के लोगों ने विकसित किया है।


शायद आप जानते हों कि Microsoft Company में दुनियां के सबसे ज्‍यादा Engineer भारतीय हैं। Google, Yahoo, PayPal, FaceBook आदि सभी कम्‍पनियों में ज्‍यादातर Engineer व Developer भारतीय हैं। NASA के ज्‍यादातर वैज्ञानिक व बडी-बडी Universities के ज्‍यादातर अध्‍यापक भारतीय हैं, जो उन Technologies को वहां विदेशी लेबल व विदेशी भाषा के साथ Develop करते हैं, जिन्‍हें भारत में Develop किया जा सकता था।

क्‍योंकि ये सारी Technologies विदेश यानी अंग्रेजी भाषी देशों में विकसित होती हैं, इसलिए निश्चित रूप से इन्‍हें International Language यानी अंग्रेजी में ही Develop किया गया है। अत: हिन्‍दी भाषा में यदि हम कोई Website या Blog बनाना चाहें, तो सबसे पहली परेशानी तो यही आती है कि हमें एक Standard Hindi Keyboard भी प्राप्‍त नहीं होता, जिसका प्रयोग करके हम हिन्‍दी भाषा में Content Create कर सकें।

और क्‍योंकि हम वर्तमान समय में हिन्‍दी नहीं बल्कि Hinglish समझते हैं, इसलिए हमें हमारे Hindi Content में भी जगह-जगह पर अंग्रेजी शब्‍दों का प्रयोग करना पडता है, ताकि हम हिन्‍दी भाषी भारतीय लोग भी उस हिन्‍दी Content को ठीक से समझ सकें। जबकि यदि हम अपने Content को शुद्ध हिन्‍दी भाषा में लिखेंगे तो शायद दुबारा पढते समय हम स्‍वयं अपने ही लिखे Content को ठीक से नहीं समझ पाऐंगे। ऐसे में वह व्‍यक्ति उस Content को कैसे समझेगा, जिसके लिए उसे लिखा गया है।

इसलिए इस Mixed Hinglish की वजह से एक ऐसा Standard Hindi Keyboard Develop करना भी मुश्किल है, जो समान समय पर Hindi व English दोनों भाषाओं में Typing करने की सुविधा देता हो।

इस परेशानी की वजह से हमें अपनी Hindi Website/Blog के लिए Content लिखने हेतु भी कई तर‍ह के Conversion करने पडते हैं, जिससे हमारे Content Develop करने की Speed काफी कम हो जाती है।

सरल शब्‍दों में कहूं तो अपनी Website http://www.bccfalna.com, जो कि एक ऐसी वेबसाईट है, जहां मैं हिन्‍दी भाषी भारतीय विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हिन्‍दी भाषा में Programming व Development के बारे में बात करता हूं, पर एक Page का हिन्‍दी Article लिखने में मुझे अंग्रेजी भाषा में Article लिखने की तुलना में कम से कम तीन गुना ज्‍यादा समय लगता है, जबकि मैं स्‍वयं Computer Programming and Development Field से पिछले 12 सालों से जुडा हुआ हूं और प्रतिदिन कम से कम 10 से 12 घण्‍टे यही काम करता हूं।

जब मुझ जैसे पर्याप्‍त तकनीकी ज्ञान वाले व्‍यक्ति के लिए हिन्‍दी Content Develop करने में इतना समय लगता है, तो कम तकनीकी जानकारी वाला Blogger तो समझ ही नहीं पाता होगा कि वह हिन्‍दी भाषा में किस प्रकार से Blogging कर सकता है।

Hindi Website/Blogs के विकसित न हो पाने का एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण कारण और है और वो कारण ये है कि हमारी Website/Blog पर ज्‍यादातर Targeted Traffic, Search Engines जैसे कि Google, Yahoo, Bing आदि से आता है और ये Search Engines उसी स्थिति में किसी Visitor को किसी Hindi Website/Blog की List Provide कर सकते हैं, जबकि वह Visitor इन Search Engines में हिन्‍दी भाषा में किसी शब्‍द को Search करे और हिन्‍दी भाषा का कोई Standard Keyboard न होने की वजह से कोई Visitor इन Search Engines में हिन्‍दी शब्‍दों का प्रयोग करते हुए Searching ही नहीं करता। ऐसे में हिन्‍दी भाषी Websites/Blogs पर इन Search Engines द्वारा जो Traffic आता है, वो भगवान भरोसे और By Mistake ही आता है।

यदि मैं मेरी ही Website की बात करूं, तो मेरी वेबसाईट पर 350 से ज्‍यादा Articles हैं, लेकिन सभी माध्‍यमों से मिलाकर भी प्रतिदिन 1000 से ज्‍यादा Pageviews नहीं होते। जबकि मैंने कई ऐसी English Websites देखी हैं, जिनमें 50 Page भी नहीं हैं, लेकिन उन पर प्रतिमाह 2 से 5 लाख तक का Pageviews हो जाता है।

कारण ये है कि भारतीय Visitor जब Google का प्रयोग किसी हिन्‍दी Website पर पहुंचने के लिए करते हैं, तो वे ‘हिन्‍दी’ शब्‍द को भी हिन्‍दी में नहीं लिखते।

यानी यदि किसी Visitor को Java Programming की जानकारी हिन्‍दी भाषा में चाहिए, तो वह Google में ‘जावा हिन्‍दी में’ Keyword लिखकर Search नहीं करते बल्कि “Java in Hindi” Keyword लिखकर Searching करते हैं। ऐसे में वे हिन्‍दी Websites/Blogs किस प्रकार से Google के Result Page पर Show होंगे, जिनमें इस Keyword का प्रयोग ही नहीं किया गया है।

हिन्‍दी भाषी Websites/Blogs के Internet पर ज्‍यादा समय तक जीवित न रह पाने की एक मुख्‍य वजह और है और वह वजह ये है कि हिन्‍दी भाषी Websites/Blogs बनाने वाले ज्‍यादातर व्‍यक्ति केवल शौख की वजह से Website/Blog बनाते हैं और जब उन्‍हें पता चलता है कि वे अपनी Website/Blog से कुछ Extra Earning भी कर सकते हैं, यानी वे अपने Blog/Website को Monetize भी कर सकते हैं, तब उन्‍हें अफसोस होता है कि उन्‍होंने हिन्‍दी भाषा में अपना Blog/Website क्‍यों बनाया।

क्‍योंकि किसी भी हिन्‍दी भाषी Blog/Website को कोई भी ढंग की कम्‍पनी जैसे कि Google, Yahoo आदि PPC Advertisement नहीं देती और हिन्‍दी भाषी Websites पर Ecommerce को भारतीय परिवेश में Setup करना एक टेढी खीर है। क्‍योंकि हमारे देश में यदि किसी Website/Blog पर किसी Product की Selling करने के लिए Payment Gateway लेना हो, तो Virtual Products की Selling के लिए भी एक Physical Registered Shop होना जरूरी है। बडा अजीब कानून है इस देश का।

मैं मेरी Website पर हिन्‍दी भाषा में लिखी गई मेरी EBooks Sell करता हूं और लोग मेरी EBooks को आसानी से खरीद सकें, इसके लिए मैंने अपनी Website हेतु Payment Gateway खरीदने के बारे में सोंचा।

लेकिन जब मैंने विभिन्‍न भारतीय Payment Gateways Providers से सम्‍पर्क किया, तो मुझे पता चला कि जब तक मेरी स्‍वयं की कोई Registered Shop या Firm नहीं होगी, जिस पर कोई Physical Product (धनियां, मिर्च आदि) न बेचा जाता हो, तब तक मैं अपनी Website के लिए Payment Gateway प्राप्‍त नहीं कर सकता।

अब समझ में ये बात नहीं आती कि अपनी EBooks को मैं धनियां के नाम से रजिस्‍टर करवाउं या मिर्च के नाम से, क्‍योंकि मेरी पुस्‍तकें न तो धनियां की तरह दिखाई देती हैं, न मिर्च की तरह तीखा स्‍वाद देती हैं। बल्कि ये तो एक ऐसा Product है, जो दिखाई ही नहीं देता लेकिन बिकता है।

इतना ही नहीं, PayPal नाम की एक कम्‍पनी की सुविधा Use करके मैं अपनी EBooks को Ecommerce के माध्‍यम से Sale करता था, जो कि केवल Commission के आधार पर अपना Payment Gateway उपलब्‍ध करवाता था, उसे भी RBI ने भारतीयों के लिए Ban कर दिया, जो कि भारतीय Online Promoters के लिए एक सबसे सस्‍ता Ecommerce Business Develop करने का साधन था और Free Available था।

सबसे बडी बात तो ये है कि इस PayPal के माध्‍यम से भारत में हर साल लाखों Dollars की Online Earning की जाती थी भारतीय Online Marketers द्वारा। RBI ने विदेशी Dollars के भारत में आने का रास्‍ता ही बन्‍द कर दिया 2011 में और ये भी एक बडा कारण रहा है 2012 व 2013 की भारत की आर्थिक मंदी का।

लेकिन जो बूढे बैठे हैं संसद में उन्‍हें आज की वर्तमान तकनीकें समझ में नहीं आती और वे आज भी शायद बैलगाडी में ही घुमाना चाहते हैं, इस देश को। इसीलिए न तो कोई सुविधा देते हैं, Technical लोगों को और न ही किसी और को ऐसी कोई सुविधा देने देते हैं।

इस दुनियां में केवल हमारे देश में ही सबसे ज्‍यादा कानून हैं और ऐसे कानून हैं, जो इस देश के विकास में बाधक हैं। इस देश के कानून तो सचमुच हमें परेशान करने के लिए ही बनाए जाते हैं। क्‍योंकि हर कानून भ्रष्‍टाचारियों को भ्रष्‍टाचार फैलाने का एक और माध्‍यम प्रदान कर देता है।

तो सारांश ये है कि जब तक हमारे देश की संसद में कुछ तकनीकी रूप से समझदार लोग नहीं पहुंचेंगे, तब तक छोटे भारतीय Online Marketers व E-Commerce Businessman अपना Online Business Establish नहीं कर सकते और जब तक छोटे लोग Internet तक नहीं चहुंचेंगे, तब तक भारतीय भाषा का Internet अस्तित्‍व खतरे में ही रहेगा।

क्‍योंकि एक Online Website/Blog का भी सालाना कुछ खर्चा होता है और उस खर्च को Maintain करने का केवल एक ही तरीका है कि अपनी Blog/Website से कुछ Side Income हो सके और कोई भी Online Advertising Company इन भारतीय Rules and Regulations के कारण हिन्‍दी भाषी Blog/Website को Ads नहीं देतीं, सामान्‍य भारतीय लोग अपनी Blog/Website के माध्‍यम से E-Commerce का प्रयोग करते हुए Online Selling नहीं कर सकते और बिना Online Income के कोई हिन्‍दी भाषी Blog/Website को आखिर कब तक अपनी कमाई से Support व Maintain करता रहेगा।

इसलिए जैसे ही लोगों को समझ में आता है कि Blog/Website से Online Earning हो सकती है और वो भी रूपए में नहीं बल्कि Dollars में, जो कि भारतीय रूपए से 60 गुना ज्‍यादा होता है, तो वह तुरन्‍त हिन्‍दी को छोडकर English Blog/Website के लिए मेहनत करने लगता है और जितनी मेहनत वह हिन्‍दी Blog/Website के लिए करता था, उसकी एक तिहाई मेहनत करते हुए भी वह कई गुना ज्‍यादा Online Earning करने लगता है।

मैं यदि मेरी ही बात करूं, तो वर्तमान में मेरी Website BccFalna.com से औसतन 20000 रूपए प्रतिमाह Earn करता है, जबकि मैंने कुल 350 से ज्‍यादा Articles लिखे हैं इस Website के लिए और लगभग 10,000 से ज्‍यादा पन्‍नों के रूप में 14 EBooks लिखी हैं। लेकिन अब अफसोस होता है कि यदि यही 350 Articles English में लिखे होते और 10000 Pages की 14 पुस्‍तकें English में लिखी होतीं, तो शायद लाखों कमा रहा होता।

क्‍योंकि English Websites Google Search Engine से बहुत सारा Targeted Search Traffic Send करता। मैं PayPal का Payment Gateway Use करते हुए International Payment Accept कर लेता अपनी Website से जबकि Indian Payments Accept करने के लिए तो यहां के बैलगाडी वाले तरीके हैं ही।

English Websites होने की वजह से मुझे किसी भी कम्‍पनी की Advertisement मिल जाती, जिसे अपनी Website पर Place करके में और Extra Side Income कर पाता। साथ ही हजारों तरह के Products की Advertising एक Affiliate के रूप में कर पाता। यानी बहुत बेहतर जिन्‍दगी होती, यदि मैंने हिन्‍दी की जगह अंग्रेजी को महत्‍व दिया होता।

ये मेरी राय हैं हिन्‍दी के Internet अस्तित्‍व व भविष्‍य के बारे में और मुझे लगता है कि हिन्‍दी को Internet पर अपना उपयुक्‍त स्‍थान प्राप्‍त करने में बहुत-बहुत-बहुत ज्‍यादा समय लगेगा। आपके क्‍या विचार हैं?

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (11-03-2014) को "सैलाव विचारों का" (चर्चा मंच-1548) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. आप का विश्लेषण सही और तर्कसंगत है , पर यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो सब बाधाओं को पार करते हुए हिन्दी को इन्टरनेट की
    भा षा बनाया जा सकता है । पर यह केवल एक आदमी का काम नहीं है , बल्कि अनेक संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से होगा । आप का लेख बहुत महत्त्वपूर्ण
    है ।

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