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सोमवार, 24 मार्च 2014

आमन्त्रित करे यार-पथिक अनजाना—525 वीं पोस्ट




आमन्त्रित करे यार-पथिक अनजाना—525 वीं पोस्ट

समस्त सुखों व शांति प्राप्ति का एक ही व्दार हैं
दर जो बहुत ही छोटा सकरा आमन्त्रित करे यार
पार जो हो स्वर्गीय आन्नद पा जावे वह भरमार
मानें खुद को मेहमान गर यहाँ आप तो बहार हैं
जब इसे मजबूती से बांधें पहुंचाये वैतरणी पार हैं
मेहमान बनोगे तो संतोष ,संतोष  तो होश रहेगा
होश में  रहोगे तो तुम सन्तुष्टि जहाँ में पावोगे
जब संतुष्टि होगी स्वत: इर्ष्या से दूर हो जावोगे
यह मंजिल तुम्हें खीझ तनाव से दूर ले जावेगी
खीझ तनाव स्वर्गीय आन्नद में जी न सकते हैं
हंसोगे सपरिवार पथिक अनजाना को हंसावोगे
क्या मेरे साथ तुम इस व्दार से निकलना चाहोगे?

पथिक अनजाना

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (25-03-2014) को "स्वप्न का संसार बन कर क्या करूँ" (चर्चा मंच-1562) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    कामना करता हूँ कि हमेशा हमारे देश में
    परस्पर प्रेम और सौहार्द्र बना रहे।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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