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शनिवार, 1 मार्च 2014

ख्याल चिन्ता व चिता—पथिक अनजाना-501 वी.पोस्ट




   ख्याल चिन्ता व चिता—पथिक अनजाना-501 वी.पोस्ट
 चिन्ता अढाई अक्षर का यह शब्द बहुत ही जालिम हैं
इंसानी दिलोदिमाग पर हर घडी रहे इसका तो पहरा
कदमों आगे चले इसकी दीदी जो कि ख्याल कहलाती हैं
जहाँ रूके जहाँ से गुजरे ये राह चिन्ता की बना जाती
घातक आकर्षक  वस्त्र अनेक पहन कई रूपों में आती है
होती हावी जिस पर दोनों चित्ता की ओर कदम बढाती हैं
पर मिलता सकून कभी चिता कब्र में दफन होकर
पूर्वजन्म लेने की चिन्ता इंसानी आत्मा को बन आती हैं
चक्र यू ही चलता रहेगा जग में ख्याल चिन्ता चिता
इन तीनों कोणों से जो टकराती आत्मा वह राह पाती
लाख कोशिशें करें लाख जपतप कर मुक्ति नही हो पाती है

पथिक अनजाना
http://pathic64.blogspot.com

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (02-03-2014) को "पौधे से सीखो" (चर्चा मंच-1539) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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