मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

रविवार, 23 मार्च 2014

भारत में तो उनकी निगाह में कोई जांच एजेंसी स्वतन्त्र बची ही नहीं कहीं ऐसा तो नहीं है कि वे आईएसआई द्वारा जांच किये जाने का इशारा कर रहे हों ?



देश के क़ानून मंत्री आई एस आई से जांच करवाना चाहते हैं ?

भारत सरकार के  माननीय क़ानून मंत्री अपने ही क़ानून को मानने से 

इंकार कर रहे हैं। गुजरात दंगों की जांच किसी स्वतंत्र निजी एजेंसी से 

करवाना चाहते हैं। क्या उनका इशारा आईएसआई की तरफ है ?यदि नहीं 

तो स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एजेंसी )पर उन्हें भरोसा क्यों नहीं है जो 

माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त की गई थी। हमारा मानना है ऐसे 

व्यक्ति को विधान सभा या फिर संसद का चुनाव लड़ने के अयोग्य जन्म 

भर के लिए घोषित किया जाए जो क़ानून मंत्रीर  के लिबास में गैर -

कानूनी 

बात  कर रहें हैं।  जो आदमी अपने देश के सुप्रीम कोर्ट  पर विश्वाश  

न करता हो उसके क़ानून मंत्री बने रहने की हैसियत ही कहाँ है। चांदनी 

चौक के चंद वोटों के चक्कर में जो सुप्रीम कोर्ट को अपमानित करने से 

बाज़ नहीं आते सुप्रीम कोर्ट को चाहिए कि उन्हें निलम्बित करके राष्ट्रीय 

दृष्टि से उन पर मुकदमा चलाया जाए। भारत के राष्ट्र जन की भावना का 

निरादर करने वाले क़ानून मंत्री बने इस शख्श को खुद ही इस्तीफा दे देना 


चाहिए। इतनी शर्म तो उनमें बची ही होगी ?

भारत में तो उनकी निगाह में कोई जांच एजेंसी स्वतन्त्र  बची ही नहीं 

कहीं 

ऐसा तो नहीं है कि वे आईएसआई द्वारा जांच किये जाने का इशारा कर  

रहे हों ?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें