मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

शुक्रवार, 16 मई 2014

शरूर क्या होता हैं—पथिकअनजाना—603 वीं पोस्ट








लगाया नही कभी अपने हाथों से मय का जाम
तो मैं क्या जानू यारों मय का शरूर क्या होता हैं
लेकिन यकीन हें मुझे पीकर जमाने के हालतों को
जिन्दगी में मुसीबतों का बडा वजूद क्या होता हैं
सच्ची मुस्कान चेहरे पर बडा सबूत क्या होता हैं
अनजानी नजरों से देखो दुनिया को जीने का नाम
मत पीना जाम दोंनों बुरे यही तजुर्बों की शाम हैं
पथिक अनजाना


1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (17-05-2014) को ""आ गई अच्छे दिन लाने वाली एक अच्छी सरकार" (चर्चा मंच-1614) पर भी होगी!
    --
    जनतऩ्त्र ने अपनी ताकत का आभास करा दिया।
    दशकों से अपनी गहरी जड़ें जमाए हुए
    कांग्रेस पार्टी को धूल चटा दी और
    भा.ज.पा. के नरेन्द्र मोदी को ताज पहना दिया।
    नयी सरकार का स्वागत और अभिनन्दन।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं