मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

मंगलवार, 8 अक्तूबर 2013

जज्बातों का चोगा

मैंने जज्बातों का
चोगा अब
उतार फेंका हैं...

अब न तो मुझे दोस्त
की दोस्ती छू पाती है
और न ही दुश्मन
की दुश्मनी...

बाग में खिले सुंदर
मोहक फूलों की
महक अब मुझे यूं
आकर्षित नहीं करती
जैसे पहले कभी करती थी...

अपनी सारी संवेदनाओ
को कुछ छुपा सा दिया है
मैंने खुद में ही
मुझमें अब न तो गुस्सा
बाकी है और
न ​ही प्यार की रसधार

बड़ी बेदर्दी से खुद में ही
कुचल दिया है मैंने अपने
जज़्बातों को
और उतार फेंका है जज़्बातों
का चोगा

4 टिप्‍पणियां:

  1. दिल कों समझाते रहना हैं "आल इज वेळ'.....
    अच्छे जज्बात रखने ही चाहिए |
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. अपनों से चोट खाए दिल यही करता -प्रभावी अभिव्यक्ति
    latest post: कुछ एह्सासें !

    उत्तर देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (09-10-2013) होंय सफल तब विज्ञ, सुधारें दुष्ट अधर्मी-चर्चा मंच 1393 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का उपयोग किसी पत्रिका में किया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  4. समय की चोट कभी कभी बागी कर देती है इन्सान को ... इससे पास पार ही जीवन है ...

    उत्तर देंहटाएं