मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

गुरुवार, 25 जून 2015

वफादार दामाद

सर्वस्वीकृत मान्य सिद्धांत है बेटा पत्नी के पक्ष में डटके  खड़ा होता रहा है। वो स्साला कमांडर भी खड़ा हो गया तो इसमें कोई नै बात नहीं। पूत सबके एक से ही सपूत होते हैं। बड़ी बात ये है जो धीरूभाईजी के साथ पहली मर्तबा घटी है। पहली बार की चुभन ज्यादा होती है। धीरे धीरे ही कम होगी।

धीरू अभी सुबहो सुबहो सो कर ही उठा है। उठते ही गुनगुने सेलाइन वाटर से गरारे करने की  आदत है सो पानी के गरारे खंगालता ड्राइंग से किचिन की ओर बढ़ रहा है। बेटा हमेशा की तरह पत्नी का बगल बच्चा बना बैठा था। बाप धीरू को देखते ही कमांडर बेटा  बोला पापा आपने मेरी सासु माँ को क्या कह दिया वो रात भर सो नहीं पाईं ,आप उनके परमेश्वर पति की जुबान  अपने मुंह में लेके क्या बोल गए ?

लो कर लो बात अब समधन समधी की हंसी मज़ाक भी सेंसर होगी इस घर में धीरू मन में सोचता रहा । बेटे ने सास के प्रति अपनी वफादारी निभाने के साथ साथ पत्नी को भी जता दिया -देखा पौ  फटते ही बाप की पेशी लगा दी।स्साला अब तक पत्नी की ही हिमायत लेता था। अब सास की भी लेगा। 

शीर्षक :वफादार दामाद 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें