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बुधवार, 24 जून 2015

किस बात का पश्चाताप

किस बात का पश्चाताप है
ईश्वर का शाप है
कल वह था
आज आप हैं
परसों किसी और का अलाप है
कहीं विच्छेद है
तो कहीं मिलाप है
कहीं पाप है
तो कहीं राम नाम का जाप है
यही तो समस्त संसार का कार्यकलाप है
सुख के पश्चात दुख
दुख के पश्चात सुख
अटल है जब यह निरंतरता
तब किस बात का करना है हुक
निसंकोच तू चलता रहा है जीवन पथ पर
लेकिन देखो सम्मुख खड़ी है मृत्यु
क्रियांवित होता रहेगा सृष्टि नियम ।
कभी उमस है तो कभी ठण्ड है
कभी ठण्ड है तो कभी ताप है
फिर नाहक सोचकर उबने की क्या बात है
तुम जानते हो भांप बूंद बनकर
बारिश में पानी का रूप लेता है
और पानी से बनता भांप है
मानव से मिट्टी का अस्तित्व
मिट्टी से मानव है
ये जग
निर्मित से नाश होने का संगम है
इसकी कार्यगति पर
न किसी का जोर चलता है न चलेगा
हमारा बस एक ही ध्येय होना चाहिए
कि भगवान के चरणों में समर्पित कर
प्रत्येक कार्य करें
चिंता न करें
क्योंकि यह व्यर्थ है
और इसका परिणाम सुखद भी न आने वाला है
इसलिए यही सोचें
जो भी मिला ईश्वर का प्रसाद है
भगवान सबका ही रखवार है
और सबकुछ उसी के हाथ है
फिर किस बात का पश्चाताप है ।

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