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मंगलवार, 30 जून 2015

कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी न होकर राष्ट्रीय सर्कस लगती है

कांग्रेस की दशा और दिशा देखकर अब ये साफ़ लगने लगा है ये राष्ट्रीय पार्टी न होकर राष्ट्रीय सर्कस है जिसके कारिंदे रोज़ नए नए करतब दिखाते रहते हैं।इस राष्ट्रीय सर्कस में काम करने वालों को  जानवर तो सीधे -सीधे  नहीं कहा जा सकता क्योंकि इनकी शक्लें आदमियों से मिलतीं हैं   जिनमें वैसे तो इन दिनों जरायमपेशा (जरायम उर्फ़ जयराम रमेश )भी शामिल हैं लेकिन सर्कस के केंद्र लगातार कथित दिग्विजय सिंह ही बने हुए हैं। इन्हें कांग्रेस से जिस प्रदेश में भी प्रभारी या आभारी बनाके भेजा है इनके हाथ पराजय ही लगी है।

इनका नवीनतम शगूफा शिवराज सिंह जी से ताल्लुक रखने वाली एक क्लिपिंग है जिसमें चुनाव पूर्व शिवराज को अपने कारिंदों (कार्यकर्ताओं )से सामान्य बातचीत करते दिखाया गया है इस वायदे के साथ कि उनका पार्टी में चुनाव बाद पूरा ध्यान रखा जाएगा। ज़नाब दिग्विजय सिंह जी यहीं नहीं रुके ये क्लिप आपने चुनाव आयोग को भी भेज दी। जांच करने के बाद चुनाव आयोग ने बतलाया कि दिग्विजय सिंह की तरह ये क्लिप भी झूठ  का पुलिंदा ही नहीं एक दम से  नकली है।जिसमें ज़नाब दिग्गी एक दो लोगों की आवाज़ें नकल करके उतारने  में करतबी साबित हुए हैं।

सोनिया को सोचना चाहिए ऐसे सर्कसी लोगों से कांग्रेस को कोई फायदा नहीं हो रहा है उलटे पार्टी की बची खुची साख भी चुक  रही है।पार्टी ४४ सांसदों के आंकड़े पे आ खड़ी हुई है।  जयराम रमेश को लोग जरायम कहने लगे हैं। हम नहीं कहते लोग ऐसा कह रहे हैं तो कुछ सोच समझ के ही कह रहे हैं लेकिन कांग्रेस समर्थक एंटीइंडियाटीवी  जैसी चैनलों को ये बात समझ नहीं आती जिन्होनें दिग्गी की नकली क्लिप को खूब उछाला। अब क्या वे इस भोपाली बाज़ीगर को उछालेंगे ?

 कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी न होकर राष्ट्रीय सर्कस लगती है। 

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