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रविवार, 28 जून 2015

अब कांग्रेस का सत्ता पर तो अधिकार रहा नहीं पर कौवे कांव कांव करना थोड़ी न छोड़ते हैं

बहुत नहीं थे सिर्फ चार थे काले कौवे ,

कभी- कभी जादू हो जाता है दुनिया में ,

दुनिया भर के गुण दिखते हैं औगुणियों में ,

ये औगुणिये चार बड़े सरताज़ हो गए ,

इनके नौकर चील गरूड़ और बाज़ हो गए।

सन्दर्भ २५ जून ,१९७५ को इंदिराजी द्वारा घोषित आपात काल का है जिसकी याद सदैव कांग्रेस बनाये रखना चाहती है -जब तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इंदिराजी द्वारा भेजे एक साधारण रुक्के पर हस्ताक्षर कर दिए थे। ये कोई संसद द्वारा बहुमत से पारित प्रस्ताव या ऑर्डिनेंस नहीं था। इलाहाबाद हाईकोर्ट से राजनारायण मामले में इंदिरा हार गईं  थीं।सुप्रीम कोर्ट ने भी बाद में कहा था कि इंदिरा भले आगामी छ : माह तक तो प्रधानमंत्री बनी रह सकतीं हैं। लेकिन न तो वह वोट कर सकेंगी और न ही लोकसभा की किसी भी कार्रवाई पर अपने हस्ताक्षर।

उस समय सिद्धार्थ शंकर रे ,बंसीलाल ,विद्याचरण शुक्ल ,एसकेबरुआ ,अम्बिका सोनी ये पांच जने थे जो रोज़ाना ट्रक भरभर कर नारे लगवाने वालों को लेजाकर इंदिरा के समर्थन में नारे लगवा देते थे। अम्बिका सोनी की यूं कांग्रेस सरकार में कोई हैसियत नहीं थीं। अलबत्ता वे संजय गांधी की चहेती थीं। ये वे जन थे जो इंदिराजी को कहते थे जनमत तुम्हारे साथ है तुम इस्तीफा मत दो। इसी का आधार लेते हुए इंदिरा जी ने यह कहते हुए कि जनता मुझे चाहती है-जनता से उसके जीने का अधिकार छीन कर इमरजंसी लगा दी। मीसा(Maintenance Of Internal Security Act ) लागू कर दिया। अखबार वालों को कोई भी रिपोर्ट छापने से पहले सीनियर एसपी को दिखानी लाज़िमी कर दी। 

दरअसल देश में कोई आपात काल के हालात नहीं थे। आपातकाल कांग्रेस की मानसिकता है राजपाट कायम रखने  की।मन की  हविश की गद्दी न छूटे , बनाये रखने की।  अब कांग्रेस का सत्ता पर तो अधिकार रहा नहीं पर कौवे कांव कांव करना थोड़ी न छोड़ते हैं।कांग्रेस ने आव देखा न ताव लोकतांत्रिक अधिकारों की हत्या  करवा दी।आडवाणी ने कांग्रेस की इसी मानसिकता की  ओर हाल ही में  संकेत किया था। इसलिए कांग्रेस को खुश होकर कोई बगलें बजाने की ज़रुरत नहीं है।इसी रक्तबीज कांग्रेस से देश को खतरा है जो इन दिनों जाति सूचक शब्द मोदी के बहाने नफरत की खेती कर रही है। जातिवाद का विष बो रही है।

और वो सोनिया हश हश करके गुलामनबी आज़ाद जैसों को उसकाती रहती है। ज़नाब नबी फरमाते हैं मोदी सब जगह जा रहे है लेकिन मुसलमानों को रमज़ान की मुबारकबाद नहीं देते। 

गौर तलब यह भी है रमज़ान को पाक महीना कहने वाले मुसलमान मुसलमानों को ही दुनिया भर की मस्जिदों में मार रहे हैं। गुलाम नबीआज़ाद  बतलाएं ऐसे में मोदी क्या कहकर और  किसे रमझान की मुबारकबाद दें?  

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