मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

रविवार, 13 सितंबर 2015

गांठ और प्रेम दोनों एक साथ नहीं हो सकते

गांठ और प्रेम दोनों एक साथ नहीं हो सकते।जहां गांठ है वहां प्रेम नहीं है।  गन्ना (Sugar cane )देखा है आपने। इसमें जहां जहां गांठ होती है वहां वहां रस नहीं होता। गांठ को ग्रंथि (हीनभावना )या मनोग्रंथि भी कहते हैं। कई व्यक्ति अपनी हीनता को छिपाने के लिए आक्रामक हो जाते हैं कुछ व्यक्तियों और वस्तुओं से छिटकने लगते हैं। नकार में जीते हैं ये लोग जहां गांठ हैं वहां जीवन में रस नहीं है।

ये पूर्वाग्रह  किसी की चमड़ी के रंग के प्रति भी हो सकता है मेधा के भी। किसी के धर्म और राष्ट्रीयता से भी चिढ़ हो सकती है कुछ लोगों को रूप लावण्य से भी । 

पूर्वाग्रह ग्रस्त व्यक्ति जीवन में कभी भी सुख नहीं प्राप्त कर सकता।संतों के भी  संत परमहंस हैं इनके पास -

न धोती है न पोथी न शिखा न सूत्र।सूत्र कहते हैं जनेऊ को। यानी जीवन का कोई ऐसा साधन नहीं है जिसमें गांठ पड़  सके।    

इनके जीवन से देहभाव ही मिट गया है इसलिए देह को ये वस्त्र रूप देखते हैं। आत्मा का.वस्त्र है ये देह।  अब एक वस्त्र के ऊपर एक और वस्त्र क्या पहनना। इसलिए ये दिगंबर रहतें हैं सनतकुमारों की तरह. इसीलिए इन्हें परमहंस कहा गया  है। इनका देह भाव देहबोध ही मिट गया है। इनके पास ऐसा कोई साधन नहीं है जिसमें गांठ पड़  सके। 

विशेष :पोथी को कपड़ा में बाांधते हैं तो गांठ लगती है। धोती पहनते हैं तो गांठ (फैंट )लगती है। शिखा (चोटी सिर पर बालों की जो अब सिर्फ कृष्णभावना भावित लोगों के सिर पर ही रह गई है  ).में गांठ बांधते हैं।  कृष्ण द्वैपायन व्यास के पुत्र शुकदेव सर्वथा उन उपादानों से मुक्त हैं जिनमें गांठ पड़  सकती है इसलिए भक्ति रस संसिक्त है.कृष्णभावना भावित हैं।  

अपवाद :केवल विवाह के समय ही वह गांठ अच्छी लगती है जिससे वरवधु बांधे जाते हैं सूत्रबद्ध दिखते हैं। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें