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शुक्रवार, 25 सितंबर 2015

पुतलों के पीछे

पुतलों के पीछे 

दिल्ली के रामलीला मैदान में रावण दहन  के  अवसर पर  प्रतिवर्ष आयोजित रामलीला में हर बरस प्रधानमन्त्री को शोभाप्रद  निमंत्रण भेजा जाता है। इस बरस स्वाभाविक तौर पर दिल्ली रामलीला कमिटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शोभाप्रद पद हेतु निमंत्रण भेजना स्वीकार किया है। यह एक सहज स्वाभाविक बात थी जिसे मुद्दा बनाके दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्वाध्यक्ष ने जो इस रामलीला समिति से संलग्न रहे आएं हैं इस्तीफा दे दिया है। उनका आग्रह था हमेशा की तरह इस बरस भी शोभाप्रद निमंत्रण सोनिया मायनो ,मंदमति और चरनन के दास मनमोहन को भेजा जाए।

हमें इस पर भी कोई एतराज नहीं हैं उन्हें भी बुलाया जाए और पुतलों के पीछे खड़ा किया जाए। अब क्योंकि कांग्रेस विपक्ष का पद भी लोकसभा में  न पा सकी है इसलिए यही उचित है विपक्ष का भी पद हासिल होता तो पुतलों के आगे खड़े कर देते।

ये कांग्रेस के कैसे हितेषी हैं  जो मायनो के अपमान का कोई मौक़ा नहीं चूकना चाहते ,पहले मनीष तिवारी और अब जयप्रकाश अग्रवाल (संरक्षक रामलीला ) . सोनिया मायनो तो यहां की परम्परा से वाकिफ नहीं है ये लोग सब कुछ जानते बूझते उनका अपमान करवाने पर आमादा है। उनकी तो नादानी सिर्फ इतनी है उनका आधार इटली में है और भवन वह भारत  में  बनाना चाहती हैं। ये तमाम लोग परदे के पीछे की बात यह है अब उन्हें हटाना चाहते हैं लेकिन साफ़ साफ़ कुछ नहीं कहते। और ये इतने निर्बुद्ध कैसे हो गए जो ये नहीं जानते कि राम लीला राम का मंच है वहां जो भी आता है उन्हें प्रणाम करने आता है मोदी भी उनका आशीष लेने ही आयेंगे।

बिना सोनिया को पूछे वह उनका नाम क्यों आगे करना चाहतें हैं कहीं मनीषतिवारी ने तो इन्हें नहीं सिखाया हो सकता है भोपाली बाज़ीगर इसके पीछे हों।

http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-congress-presidents-resignation-on-ramleela-dispute-12939279.html

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