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शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

सज़ा भगवान् ही दिलवाता है कर्मों के अनुरूप कोर्ट कचहरी माध्यम बनते हैं।लेकिन एक व्यवस्था के तहत।

FQA


Question .Is it necessary for human beings to punish wrong doers?Is it God's work to punish others or is it ours?How can we judge others when we ourselves are flawed ,as opposed to God ,Who has no flaws?

Answer.It is true that God is administering this world ,but we should not neglect doing our individual or social duties ,with the justification ,"I do not need to bother .Let God take care of this ."For example ,on the prescription slips of doctors ,often this letter is their :

Rx -which means "I treat He cures ,then what is the need for the doctor to treat ;the doctor should simply leave it to God .But that would be irresponible behavior on the part of the doctor .

Rx is also the symbol for the Roman God Jupiter .The Egyptians considered it a symbol of restored health .Rx is an abbreviation for the Latin word "recipere " or "recipe" which means "take thou ."

ऐसा करना  डॉक्टर को निरभिमानी  और विनम्र बनाए रहता है।

 ये सारी कायनात बाइबिल के अनुसार परमेश्वर की बनाई हुई है। भले हम अपना कार्बन फुटप्रिंट  बढ़ाते  जाएँ वह  प्रकृतिक बलों को समायोजित करके इसे दुरुस्त  कर लेगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है हम अपने पर्यावरण को जिबह करते चले जाएँ। 

ये पृथ्वी सूरज चाँद तारा भी परमेशवर ने बनाए वह जलप्लावन भी कर सकता है खगोलीय पिंडों का तापमान भी कम ज्यादा कर सकता है। फिर भी आज जलवायु परिवर्तन का बेहद हल्ला है। विश्व के गरमाने की दुष्चिंता  है ओजोन का कवच टूटने की   फ़िक्र है।

आखिर हमारा नागर दायित्व भी है कुछ। हम भगवान् को यह कहें वह हमारे माध्यम से काम करे हमें अच्छे कर्मों की और उन्मुख करे। हम अपने पर्यावरण और समाज को प्यार  करें इसकी हिफाज़त करें। 

कोर्ट कचहरी पुलिस प्रशाशन अपराध तत्व को सज़ा देने के निमित्त ही बनाए गए हैं। वरना आदमी छुट्टा घूमें अपराध कर्म के बाद। सुधार गृह भी इसी निमित्त बनाए गए हैं। सब कुछ भगवान् भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। जो अधर्म के  साथ है उसे सज़ा मिलनी चाहिए। लेकिन इसका फैसला क़ानून करेगा कोई खाप पंचायत या  गुंडों का समूह नहीं।ये काम भी भगवान् का ही है। गीता में कृष्ण कहते हैं -हे अर्जुन जो अधर्म के साथ खड़ा हुआ है उसे मार ने में कोई हर्ज़ नहीं है। वह तो पहले ही मरा हुआ है  तुम्हें तो इन्हें मुखाग्नि ही देनी है। 

सज़ा भगवान् ही दिलवाता है कर्मों के अनुरूप कोर्ट कचहरी माध्यम बनते 

हैं।लेकिन एक व्यवस्था के तहत।   

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