मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

मंगलवार, 22 अप्रैल 2014

अंक बढाते हैं-पथिकअनजाना—588 वी पोस्ट



यारों मुझसे क्यों खफा खफा सारा ही जहान हैं
मतभेद विचारों का जो छाया रहता अनजान हैं
घिरा हूं प्रश्न गुरू को ले जवाब मैं न पा सका
कहने पर, चमत्कारियों को गुरू न सजा सका
निगाहें कर्मों पर या भक्ति पर सवारी दो नांवे
कहते सुकर्म करो वही भविष्य तुम्हारा सुधारेंगे
कहते भक्ति करो रब वैतरणी वही पार करावेंगे
कर्म करने से पहले न सोचा सजा से भय क्यों ?
यारों हंसते हुये सजा स्वीकारे अगले कर्म सुधारे
अभ्यास करे व ध्यान आत्मा की आवाज पर धरें
प्रश्न बाद उत्तर प्राप्ति तक शांति को अपनायेगे
अपनी बेसब्री से हम तो खुद सुराह को खो देते हैं
स्वार्थों से फैसला खुद दुष्कर्मौं के  अंक बढाते हैं

पथिकअनजाना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें