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शुक्रवार, 18 अप्रैल 2014

काश हमारे देश के लिए भी ये आंकड़े लागू हो पाते जो मधुमेह का आलमी केंद्र बना हुआ है लोग इलाज़ के लिए तब आते हैं जब पेशाब पर चींटे रेंगने लगते हैं शक्कर पेशाब में भी आने लगती है

बेशक अमरीका जैसे अमीर मुल्कों में मधुमेह के खिलाफ लाम बंद होने और खबरदारी बनाये रहने की बदौलत आज मधुमेह से पैदा होने वाले पेचीला -पन  के खिलाफ जंग कमोबेश कामयाबी से चल रही है 












लेकिन ठीक यही बात हमारे देश के बारे में अभी भी नहीं कही  जा सकती। भले इलाज़ यहां भी अद्यतन मयस्सर है लेकिन लोगों को बारहा आगाह करते रहने के बाद भी नतीजे उतने उत्साह वर्धक नहीं रहे हैं। चलिए एक छोटा सा सेम्पिल सर्वे आपके सामने रखते हैं। मैं यहां मुंबई कोलाबा के एक सभ्रांत इलाके में रहता हूँ। पश्चिमी नौ सेना कमान मुख्यालय है यह जगह जो आम भाषा में नोफ्रा (NOFRA ,NAVAL OFFICERS FAMILY RESIDENTIAL AREA )कहलाती है। 

सेहतनामा लिखने के अलावा मैं जब भी और जैसे ही मुझे ये किसी भी स्रोत से ,कैसे भी पता चलता है की अमुक भाई या बहन को गर्ज़ ये की यहां के किसी भी वाशिंदे को मधुमेह है और वह इसके प्रति लापरवाह बना हुआ है मैं अपनी जान लड़ा देता हूँ उसे इलाज़ शुरू करवाने और उसपे कायम रहने के लिए। निरंतर दवाएं लाकर भी देता हूँ चेक भी करता हूँ। इन लोगों में कई अफसरान भी शामिल हैं जो और तरीके से लापरवाह हैं मसलन खबरदारी के चलते भी रोग का इल्म  होने पर भी दारु भी उड़ाते हैं नियमित समोसे भी खाते हैं। पूछने पर बतलाते हैं अब तो बस फास्टिंग शुगर २५० -३०० मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर है ,नाश्ते के बाद की ३५० ,पहले तो ५०० मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर रहती थी। 

कर लो इनसे क्या बता करोगे और क्या इन्हें समझाओगे। 

एक नेवल टेलर हैं मुसलमान हैं ये महोदय कहते हैं -दवाई नहीं खाऊंगा तो क्या हो जाएगा। मेरे मामू पहले खाते थे अब बिलकुल नहीं खाते उनकी तो डायबिटीज़ ठीक हो गई कुछ भी नहीं हुआ। ये और ऐसे तमाम लोग 'मोड आफ डिनायल 'में रहते हैं यानी रोग है लेकिन उसके प्रति ये गंभीर नहीं हैं लापरवाह बने हुए हैं रोग को बाकायदा तस्दीक नहीं कर पा रहे हैं। बिलकुल नहीं समझ पा रहे हैं ये पूरे शरीर का रोग है कैंसर की तरह जो किसी भी प्रमुख अंग मसलन दिल ,दिमाग ,गुर्दे ,आँख ,लिम्ब किसी को भी ले बैठेगा एक दिन इसी ला -परवाही के चलते।

क्या बरखा जब कृषि सुखाने वाली कहावत चरितार्थ हो जाएगी जब बड़ी नुकसानी अचानक पेश आएगी। 

सब ठाठ पड़ा रह जाएगा जब हाँक चलेगा बंजारा   

अब बतलाइये ऐसे में कोई मधुमेह का माहिर क्या कर सकता है वह तो आपको बढ़ी हुई और खून में लगातार तैरती शक्कर और घुली हुई अतिरिक्त चर्बी ,बढे हुए रक्त चाप को काम करने की दवा ही लिखेगा। खानी तो आपको ही पड़ेगी। 

हर तीन घंटे बाद कुछ न कुछ मधुमेह के अनुरूप खाना भी आपको ही पड़ेगा क्योंकि सही और नियमित समय पाबंदी के साथ खानपान बनाये रखना इसके इलाज़ का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो शुगर के अनावश्यक उछाल को रोकता है। 

काश हमारे देश के लिए भी ये आंकड़े लागू हो पाते जो मधुमेह का आलमी केंद्र बना हुआ है लोग इलाज़ के लिए तब आते हैं जब पेशाब पर चींटे  रेंगने लगते हैं शक्कर पेशाब में भी आने लगती है। 

कौन खिलाये इन्हें भुने हुए चने ,ककड़ी खीरा जबकि इनकी नज़र पाँव बड़ा ,पाँव भाजी ,से पर नहीं देख पाती। 

कौन खिलाये इन्हें चने की ज्वार -बाजरे की रोटी जबकि इन्हें सफ़ेद मैदा से प्यार है। सफ़ेद चावल ,सफ़ेद चीनी का चस्का है। ब्राउन राइस इन्हें खिलाके दिखाओ ज़रा कैसा मुंह बिचकाएंगी। स्वाद और रंगत की बात करेंगे। 

दारु से परहेजी का कहके देखो खीसे निपोड़ देंगे। 

 







  1. Anti-diabetes efforts lead to cut in healthhealth risks


    The number of Americans with diabetes more than tripled over the period of the study and is now nearly 26 million.

Anti-diabetes efforts lead to cut in health risks

Federal researchers on Wednesday reported the first broad national picture of progress against some of the most devastating complications of diabetes, which affects millions of Americans, finding that rates of heart attacks, strokes, kidney failure and amputations fell sharply over the past two decades. The biggest declines were in the rates of heart attacks and deaths from high blood sugar, which dropped by more than 60% from 1990 to 2010, the period studied. 

While researchers had had patchy indications that outcomes were improving for diabetic patients in recent years, the study, published in The New England Journal of Medicine, documents startling gains. 

"This is the first really credible, reliable data that demonstrates that all of the efforts at reducing risk have paid off," said Dr David M Nathan, director of the Diabetes Center at Massachusetts General Hospital, who was not involved in the study. "Given that diabetes is the chronic epidemic of this millennium, this is a very important finding." 

The number of Americans with diabetes more than tripled over the period of the study and is now nearly 26 million. Nearly all the increase came from Type 2 diabetes, which is often related to obesity and is the more common form of the disease. An additional 79 million Americans have pre-diabetes, which means they are at high risk of developing the disease. 

Researchers from the Centers for Disease Control and Prevention, who wrote the study, estimate that diabetes and its complications account for about $176 billion in medical costs every year. The study measured outcomes for both Type 1 and Type 2. 

Experts said the declines were the fruit of years of efforts to improve the health of patients with Type 2 diabetes. Doctors are much better now at controlling the risk factors that can lead to complications — for example, using medications to control blood sugar, cholesterol and blood pressure — health experts said. What is more, a widespread push to educate patients has improved how they look after themselves. And a major effort among health care providers to track the progress of diabetes patients and help steer the ones who are getting off track has started to have an effect. 

1 टिप्पणी:

  1. अब इसे पढ़ाये कौन किसी को :)
    अक्ल भी है पर लट्ठ भी है जिनके पास :)

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