मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

जिसने नाम खुदा का---पथिक अनजाना—590 वीं पोस्ट



शुक्र मनाये वो खुदा जमीन पर उतारे गये सारे ही जीवों में
एक जीव ऐसा निकला जिसने नाम खुदा का रोशन किया
वह इंसान हैं भले ही जमात इसमें जयचन्दों की शामिल हैं
इन्होंने खौफ खुदा का चर्चित कर खुदा का डंका बजाया हैं
गर यह जयचन्द न होते तो खुदा  नाम तेरा कौन लेता
माना तेरे नाम की आड में फले फूले बहार व व्यापार हैं
शुक्र मनाता खुदा तभी जयचन्दों का शायद रखता ध्यान
वर्ना वन में जो फूले खुश्बूदार फूल की महक कौन जानता
वैज्ञानिक कहते प्राकृतिक प्रर्किया ब्रम्हाण्ड संचालित करती
जयचन्द  कहते सब होता घटित ब्रम्हाण्ड में तेरी माया हैं
विचारक कहते कर्मों से बनी हर इंसानी जीवन कहानी हैं
दुकाने,पोथियाँ सब सजाये पथिक की सोच अनजानी हैं

पथिक अनजाना

1 टिप्पणी: