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बुधवार, 23 अप्रैल 2014

यारों दिन जिन्दगी के—पथिकअनजाना—589 वीं पोस्ट



यारों दिन जिन्दगी के यहाँ इतने कम हैं कि
जागो उन्हैं बीते कल की यादों में न यूं बीता दो
मुश्किलों का कम फासला हैं जिसे तुरन्त जीतो
मुश्किलों की बेमिसाल यादगार तुम बना दो
न सोचो बैठ खुदा रची दुनिया तेरी यह कैसी हैं
कोई हर बात  में इज्जत या  बेइज्जत होता हैं
कोई ताउम्र बहाता पसीना नही स्थान पाता हैं
नाम कोई मरने बाद, कोई नामी बदनाम होता
निगाहों में खुद की सही हो जाँच परख के बाद
हालातों को रख नजर फैसला मान दिलावेगा

पथिक अनजाना

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 24-04-2014 को चर्चा मंच पर दिया गया है
    आभार

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