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शनिवार, 26 अप्रैल 2014

राजनाथ स‍िंह-एनडी त‍िवारी की मुलाकात को आप क्या मानेंगे ? भाजपा के लिए फायदेमंद कांग्रेस के लिए फायदेमंद दोनों के लिए घातक बे -बाकी से दो टूक टिप्पणी करें

राजनाथ पर फिदा एनडी त‍िवारी यह क्या कह गए ...

राजनाथ पर फिदा एनडी त‍िवारी यह क्या कह गए ...


लखनऊ। राजनीत‍ि की धाराएं कब किस किनारे पर आकर मिल जाएं, कहा नहीं जा सकता। शब्दों में भले ही पक्ष व विपक्ष नाम के चर्चे होते हों, पर हकीकत से आज आमना-सामना हो ही गया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा लखनऊ लोकसभा क्षेत्र से प्रत्यशी राजनाथ सिंह ने आज सुबह दस बजे से अपने जनसंपर्क अभियान के दौरान कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे नारायण दत्त तिवारी से भी आशीर्वाद लिया। एनडी तिवारी ने भी उनको गले लगाया और काफी देर तक राजनाथ का हाथ पकड़ उनकी प्रशंसा करते रहे। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी ने राजनाथ सिंह की जमकर प्रशंसा की। एनडी ने कई लोगों की मौजूदगी में कहा कि मेरा राजनाथ सिंह को पूरा समर्थन है। राजनाथ सिंह तो राजा है। मन से भी राजा और काम से भी राजा।

इस दौरान राजनाथ सिंह ने पैर छूकर एनडी तिवारी का आशीर्वाद लिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि मेरे राजनीतिक जीवन में एनडी तिवारी का आशीर्वाद शुरू से ही रहा है और सदैव रहेगा। सियासी तौर पर इस मुलाकात के जैसे भी मायने निकाले जाएं, पर इतना तय है कि राजनाथ ने 'एनडी चाल' चलकर नई शतरंज बिछा दी है। यह भी पढ़ें - 'जनता' थी निशाने पर अब तक भाजपा के भीतर श‍िकायत रही है कि यहां कोई एकजुट नहीं रहता, सभी अपने आप में 'नेता जी' बनकर रहते हैं। इस मुलाकात से राजनाथ ने संदेश देने की कोश‍िश की है कि भाजपा मिलजुलकर समन्वय के साथ राजनीत‍ि करती है। इससे पहले राजनाथ सिंह कैथेड्रिल में कुछ ईसाई धर्मगुरुओं से भी मिले। इसके बाद शिक्षक नेताओं से मुलाकात करने के बाद एनडी तिवारी से मिलने उनके घर पर पहुंचे। पत्रकारों के सवाल पर एनडी ने राजनाथ की जमकर तारीफ की और बोले कि वे तो नाथ हैं, यान‍ि राजा हैं।

राजनाथ स‍िंह-एनडी त‍िवारी की मुलाकात को आप क्या मानेंगे ? भाजपा 

के लिए फायदेमंद कांग्रेस के लिए फायदेमंद दोनों के लिए घातक

बे -बाकी से दो टूक टिप्पणी करें 


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6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब कहा है गौरव भाई !हमारा भी मानना है राजनीति में रिश्ते होते हैं रिश्तों में राजनीति नहीं। रिश्ते निर्दोष होते हैं। स्नेहिल होतें हैं।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (27-04-2014) को मन से उभरे जज़्बात (चर्चा मंच-1595) में अद्यतन लिंक पर भी है!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    1. ये नेताओं के मजबूत रिश्ते होते हैं
      मतदाता बस और बस बेवकूफ होते हैं ।

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  4. एक ही थैली के चट्टे-बट्टे वाली कहावत है. .. एक ही स्तर के लोगों की एक जैसे कार्य शैली होती है.. क्या कहें !

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