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रविवार, 27 अप्रैल 2014

परिपूरक प्रकृति क्या हैं ?—पथिक अनजाना—593 वीं पोस्ट



नही कह सकता कोई प्रकृति इंसा को जमीं आखिर ले कहाँ जा रही हैं
प्रकृति का रूप आकार चल अचल स्वरूप सब विशाल समझ से परे हैं
लेकिन प्रकृति की पुकार इशारों को संदेश को इंसान न कभी सुनता हैं
न जाने किस प्रकृति का स्वंय न समझे प्रकृति की प्रकृति क्या होती हैं
जिसे खुद की प्रकृति पर यकीन नही वह क्या प्रकृति को समझ पावेगा
जो प्रकृति की  लय पर जीता वही प्रकृति के लिये विनाशक हो जावेगा
नही समझ आता इंसानों को दोनों प्रकृतियों की परिपूरक प्रकृति क्या हैं?
पथिक अनजाना


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